रायगढ़ नगर निगम में सवा 22 करोड़ लाभ का बजट पेश, 480 करोड़ की सरकार

■ राजस्व लक्ष्य 94.74 करोड़, विकास निधि में भेदभाव का पार्षदों ने लगाया आरोप
रायगढ़ । रायगढ़ नगर निगम में सोमवार को शहर सरकार का सालाना बजट पेश किया गया। महापौर जीवर्धन चौहान ने 480 करोड़ 36 लाख रुपये का बजट प्रस्तुत करते हुए 22 करोड़ 24 लाख 21 हजार रुपये के अनुमानित लाभ का दावा किया। बजट में कुल 480 करोड़ 36 लाख आय और 458 करोड़ 11 लाख व्यय का लक्ष्य रखा गया है।
महापौर ने कहा कि इस बजट के माध्यम से शहर के सभी वार्डों में विकास कार्यों को गति दी जाएगी और आने वाले वर्ष में नगर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
बजट की बड़ी बातें
कुल आय का लक्ष्य: 480 करोड़ 36 लाख रुपये
कुल व्यय का लक्ष्य: 458 करोड़ 11 लाख रुपये
अनुमानित लाभ: 22 करोड़ 24 लाख रुपये से अधिक
राजस्व आय का लक्ष्य: 94 करोड़ 74 लाख रुपये
पूंजीगत आय (ऋण, अनुदान, निवेश आदि): 387 करोड़ 62 लाख रुपये
पैसा कहां से आएगा
नगर निगम ने इस वर्ष आय बढ़ाने के लिए कई टैक्स और शुल्कों में संशोधन किया है।
संपत्ति व समेकित कर में वृद्धि
विज्ञापन टैक्स और उत्पाद कर में बढ़ोतरी
बार लाइसेंस से आय का लक्ष्य बढ़ाया गया
निगम की संपत्तियों (भवन, भूमि, दुकान आदि) से आय का लक्ष्य 32 करोड़ से बढ़ाकर 34 करोड़ रुपये
विकास प्रभार, जुर्माना और उपयोगकर्ता शुल्क में बढ़ोतरी
केंद्र व राज्य सरकार से 27 करोड़ 12 लाख रुपये अनुदान का अनुमान
हालांकि जलकर वसूली का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में कम किया गया है।
पैसा कहां खर्च होगा
बजट में कर्मचारियों, विकास और शहर की सुविधाओं पर बड़े खर्च का प्रावधान रखा गया है।
वेतन, मजदूरी व पारिश्रमिक: करीब 20 करोड़ रुपये
पेंशन व सेवानिवृत्ति संबंधी खर्च: 29 करोड़ 68 लाख रुपये
बिजली बिल: 11 करोड़ रुपये
सड़क, नाली और मेंटेनेंस: 9 करोड़ 71 लाख रुपये
सफाई और शुद्ध जल व्यवस्था: 24 करोड़ रुपये
पार्क, बाजार, सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव: 4 करोड़ 29 लाख रुपये
संसाधन खरीदी: 19 करोड़ रुपये
“जोहार–रायगढ़” चैटबॉट एप शुरू
नागरिकों की शिकायत और सुझाव सीधे निगम तक पहुंचाने के लिए “जोहार–रायगढ़” चैटबॉट एप की शुरुआत भी की गई। इसके जरिए लोग अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
बजट बैठक में हंगामा, पार्षदों के आरोप
बजट पेश होने के दौरान विपक्षी पार्षदों ने निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
भाजपा पार्षद आशीष ताम्रकार ने आरोप लगाया कि वार्ड विकास निधि का आवंटन चेहरा देखकर किया जा रहा है और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने शहर के चिन्हित तालाबों के उन्नयन में अपने वार्ड के तालाब को भी प्राथमिकता देने की मांग की।



