खाते में जीरो बटा सन्नाटा : आर्यभट्ट की गणना नही बल्कि यह कांग्रेस के कुकर्म का फल है – भाजयुमो

■ शून्य को कमतर आंकना आर्यभट्ट का अपमान नहीं, 400 से शून्य पर पहुंची कांग्रेस का आईना है” – सुमीत शर्मा
रायगढ़ । जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ के पूर्व अध्यक्ष अनिल शुक्ला द्वारा वित्त मंत्री ओपी चौधरी पर लगाया गया “शून्य को कमतर आंककर आर्यभट्ट का अपमान” करने वाला आरोप हास्यास्पद है। कांग्रेस अपनी हार का सदमा आज तक भूल नहीं पाई है।
भाजयुमो जिलाध्यक्ष सुमीत शर्मा ने कहा कहा आर्यभट्ट के शून्य का अपमान कांग्रेस कर रही है, भाजपा नहीं ।
आर्यभट्ट ने शून्य की खोज कर भारत को दुनिया का गुरु बनाया। शून्य का अर्थ है पूर्णता, अनंतता और ब्रह्म। हमारे वेदों में कहा गया है – ‘पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते’। शून्य अपमान नहीं, सृजन है। ओपी चौधरी जी ने शून्य का अपमान नहीं किया, उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का यथार्थ चित्रण किया है। सुमीत ने कहा 65 हजार की हार का सदमा कांग्रेस भूल नहीं पा रही । ओपी चौधरी जी ने रायगढ़ विधानसभा में कांग्रेस को 65,000 वोटों से हराया। यह रायगढ़ के इतिहास में।कांग्रेस की सबसे बड़ी हार थी। इस हार के बाद लोकसभा में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी और फिर नगरी निकाय चुनाव में भी जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। यह शून्य की ओर बढ़ने का सफर आर्यभट्ट की गणना नहीं, राहुल गांधी की नाकामी का परिणाम है। शून्य से डर भाजपा को नहीं, कांग्रेस को लगता है । भाजपा 2 सीटों से शुरू हुई और आज पूर्ण बहुमत में है। हमने शून्य को देखा है, जिया है और शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। इसलिए भाजपा कार्यकर्ता के लिए शून्य कमतर नहीं, संघर्ष की पहली सीढ़ी है। लेकिन कांग्रेस 400 सीटों से चलकर आज कई राज्यों में 0 सीटों पर सिमट गई है। देश के अनेक क्षेत्रों में भाजपा को शून्य या नगण्य सीटों से संतोष करना पड़ा है? यह सवाल पूछने से पहले अनिल शुक्ला जी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।कांग्रेस के शून्य को अहंकार का शून्य बताते हुए कहा
हमारे शास्त्रों में दो शून्य हैं। एक है शिव का शून्य – जो पूर्ण है, और दूसरा है अहंकार का शून्य – जो खोखला है। भाजपा का शून्य शिवत्व है, जो संगठन से, सेवा से भरता है। कांग्रेस का शून्य अहंकार का शून्य है, जहां परिवारवाद है, सत्ता का मद है और जनता से दूरी है। ओपी चौधरी जी ने उसी खोखले शून्य की बात की है। चुनावी समीक्षा एक राजनीतिक प्रक्रिया है किसी भी वैज्ञानिक अपमान नहीं है।=चुनावी परिणामों की समीक्षा करना हर दल का अधिकार है। ओपी जी ने कहा कि कांग्रेस शून्य की ओर बढ़ रही है, यह एक राजनीतिक विश्लेषण है। इसे आर्यभट्ट से जोड़ना विज्ञान और राजनीति दोनों का अपमान है। अगर अपनी हार पर चर्चा करना आर्यभट्ट का अपमान है, तो कांग्रेस पिछले 11 साल से ईवीएम और चुनाव आयोग को गाली देकर किसका अपमान कर रही है? अनिल शुक्ला जी को सलाह है कि आर्यभट्ट के शून्य में उलझने की बजाय, कांग्रेस क्यों शून्य पर पहुंच रही है, इसका आत्मचिंतन करें। रायगढ़ की जनता ने आपको तीन बार शून्य पर ला दिया है, यह आर्यभट्ट की गणना नहीं, आपकी करनी का फल है।
