निगम के जलकर वसूली में विसंगति,गरीबों का जमकर आर्थिक शोषण

■ ₹60 का जलकर बना ₹200 का ‘खामोश खेल’ !
■ नगर निगम पर गरीबों की जेब काटने का आरोप, जयंत ठेठवार ने खोला मोर्चा
■ ऑनलाइन टैक्स व्यवस्था में हजारों परिवारों से नियमों के विपरीत अधिक जलकर वसूली , निष्पक्ष जांच की मांग
रायगढ़ । नगर निगम की ऑनलाइन टैक्स प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष , पूर्व नगर निगम सभापति एवं वरिष्ठ पार्षद जयंत ठेठवार ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि नगर निगम द्वारा गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों से निर्धारित ₹60 प्रतिमाह के स्थान पर ₹200 प्रतिमाह जलकर वसूला जा रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ डालने वाला मामला बताया।
कांग्रेस भवन मे आयोजित प्रेस वार्ता में पार्षद जयंत ने कहा कि नगर निगम के 48 वार्डों में ऑनलाइन टैक्स प्रणाली में लगभग 11,005 मकान दर्ज हैं, जबकि इनमें बड़ी संख्या ऐसे आवासों की है जो इंदिरा आवास, अटल आवास, अंबेडकर आवास, ईडब्ल्यूएस मकान तथा अन्य आवासीय श्रेणी में आते हैं। शासन के प्रावधानों के अनुसार इन परिवारों से केवल ₹60 प्रतिमाह जलकर लिया जाना चाहिए, लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था में इन्हें व्यावसायिक अथवा अन्य श्रेणी में दर्शाकर ₹200 प्रतिमाह वसूला जा रहा है।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस पार्षद ने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि नगर निगम परिषद द्वारा वर्ष 2018 में शहर के सभी संपत्तिकर एवं जलकर निर्धारण संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए थे। इसके बावजूद ऑनलाइन टैक्स प्रणाली में अनेक आवासों की गलत श्रेणी दर्ज होने से गरीब परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
जयंत ठेठवार ने उदाहरण देते हुए कहा कि बंदे अली फातमी, षडंगी कॉलोनी, लोचन नगर, चिरंजीव दास नगर, छोटे अतरमुड़ा, परमहंस नगर, आईटीआई परिसर तथा अटल आवास सहित कई क्षेत्रों के सैकड़ों मकानों में यही स्थिति सामने आई है। उनके अनुसार इन कॉलोनियों में रहने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं, जिन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन उलटे उनसे अधिक कर वसूला जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि नगर निगम के 24 वार्डों में ही 83 परिवारों तथा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लगभग 777 परिवारों से अधिक जलकर वसूले जाने के उदाहरण मिले हैं। इतना ही नहीं, दस्तावेजों के अनुसार भविष्य में लगभग 3005 और परिवारों से भी इसी प्रकार अधिक जलकर वसूले जाने की आशंका है क्योंकि उनकी श्रेणी का ऑनलाइन रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है। जयंत ने आरोप लगाया कि नगर निगम के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर है। उनके अनुसार ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज मकानों और वास्तविक आवासों के आंकड़ों में भी करीब 42 प्रतिशत की विसंगति दिखाई देती है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, गलत श्रेणी में दर्ज मकानों को तत्काल संशोधित किया जाए तथा जिन परिवारों से अधिक जलकर वसूला गया है, उन्हें राशि वापस की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि “गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिकारों से समझौता नहीं होने देंगे। “यदि नगर निगम ने ऑनलाइन टैक्स व्यवस्था की विसंगतियां दूर नहीं कीं तो जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।”








