स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव ; पुलिस बैरिकेड पर रुका मार्च

■ महात्मा गांधी चौक से निकली रैली, सड़क पर धरना
■ सरकार और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी
रायगढ़ । स्मार्ट मीटर के विरोध में सोमवार को जिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने संयुक्त रूप से कलेक्ट्रेट घेराव का प्रयास किया। महात्मा गांधी चौक से निकले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के मार्च को पुलिस ने कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और राज्य सरकार तथा बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने बैरिकेड्स के सामने ही धरना देकर अपना विरोध जारी रखा।
पूर्व मंत्री एवं खरसिया विधायक उमेश पटेल ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सबसे अधिक बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार बिजली कटौती हो रही है और स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी तेजी से बढ़े हैं। उनके अनुसार कई उपभोक्ताओं के बिल पहले की तुलना में तीन से चार गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि प्रदेशभर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाकर फिर से सामान्य बिजली मीटर लगाए जाएं। उनका कहना था कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स के सामने धरना दिया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने फिल्मी गीतों की धुन पर नृत्य करते हुए और वाटर कैनन चलाने की मांग करते हुए अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। पूरे समय सरकार विरोधी नारों से प्रदर्शन स्थल गूंजता रहा।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने कहा कि कांग्रेस स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चला रही है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवा रहे हैं, ताकि सरकार पर स्मार्ट मीटर हटाकर सामान्य मीटर लगाने का दबाव बनाया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिजली बिल हाफ योजना से आम लोगों को राहत मिलती थी, जबकि वर्तमान सरकार जनता की बजाय ठेकेदारों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने सरकार से स्मार्ट मीटर योजना पर तत्काल पुनर्विचार कर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की।








