हत्या की आरोपी महिला को आजीवन कारावास की सजा और अर्थ दण्ड से भी हुई दण्डित

घरघोडा । न्यायालय अभिषेक शर्मा अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा ने हत्या के आरोपिया यशोदा उर्फ दशोदा सारथी को देवा उर्फ लखन सिदार के हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 2000/ रू के अर्थ दण्ड से भी दण्डित किया।
मामले का संक्षिप्त विवरण देते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि मामला थाना कापू के अपराध क्रमांक 37/2021 के अनुसार इस प्रकार है कि दिनांक 02 मार्च 2021 को ग्राम भोजपुर थाना कापू के कोटवार नैहर दास ने थाना उपस्थित होकर सूचना दिया था कि आरोपिया यशोदा उर्फ दशोदा सारथी का प्रेमी देवा उर्फ लखन सिदार निवासी महुआ पाली खरसिया दिनांक 01 मार्च 2021 को रात्रि लगभग 8/30 बजे भोजपुर बतौर मेहमान आया था जो लगभग 9/30 बजे अपने शरीर में मिट्टी का तेल छिड़ककर माचिस मारकर आत्म हत्या कर लिया था।
उक्त सूचना के आधार पर तत्कालीन विवेचना अधिकारी धनी राम राठौर ने मर्ग कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया तथा विवेचना में यह पाया कि घटना दिनांक को मृतक देवा उर्फ लखन सिदार अपनी प्रेमिका यशोदा उर्फ दशोदा सारथी से मिलने आया था किन्तु यशोदा उर्फ दशोदा सारथी का एक अन्य प्रेमी फरार आरोपी दुष्यंत यादव को यशोदा के पास देख कर उससे आपस में भिड़ गया तभी आरोपी गण ने मिलकर मृतक देवा उर्फ लखन सिदार का गला दबाकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए उसके शव को मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी।
दूसरे दिन सुबह आरोपिया यशोदा ने गांव के कोटवार नैहर दास को मृतक के द्वारा आत्म हत्या कर लेने की सूचना दी थी।
विवेचना के दौरान आरोपिया यशोदा ने सह आरोपी दुष्यंत यादव के साथ मिलकर मृतक देवा की हत्या कर उसके शव को जलाने की बात स्वीकार की अन्य सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य को संकलित कर स्वतंत्र साक्षियों के बयान के आधार पर तथा परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आधार पर यशोदा सारथी एवं फरार आरोपी दुष्यंत यादव के विरुद्ध धारा 302, 201, भारतीय दण्ड संहिता के तहत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया था।
माननीय न्यायालय में मामले का विचारण दौरान सभी साक्षियों के कथन दर्ज कराए तथा उभय पक्ष के तर्क श्रवण करने के पश्चात आरोपिया यशोदा उर्फ दशोदा सारथी को देवा उर्फ लखन सिदार की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा ₹1000= 1000रू के अर्थ दण्ड से दण्डित करने का दण्डादेश दिया।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने मृतक के आश्रितों को विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से क्षतिपूर्ति राशि 100000/रू दिलाए जाने की अनुशंसा भी की है।








